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" रोयल भेल "
चलिये ...आज, " दाल रोटी चावल " पे , चावल से बने कुरमुरोँ की बानगी बनायेँ !कुरमुरा बाज़ार से लेकर आयेँ उसे बडी छलनी मेँ साफ कर लेँ। फिर एक बडे पतीले मेँ, ३ चम्मच तेल डालकर , हल्की आँच पर गरम करिये फ...
Lavanyam - Antarman द्वारा Thu May 15 20:36:36 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
बुंदेलखंड की यात्रा
ओरछा बुंदेलखंड का दर्शनीय स्थल है। यहाँ के लाला की अपनी एक महान गाथा है। आन, बान, शान के लिए कैसे जिया जाता है, कैसे मरा जाता है कोई लाला हरदोल से सीखे। बुंदेलखंड के पानीदार पानी की एक नहीं अनेक कहा...
KUMARENDRA द्वारा Thu May 15 20:31:07 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
धोनी ने सचिन को और सचिन ने धोनी को पटखनी दी
मैं सचिन को पसंद करता हू। मैं सचिन की इज्जत करता हू। लेकिन मैं धोनी का फैन हू। मिस्टर कूल कप्तान को मैं नही कई लोग पसंद करते हैं। उनकी इज्जत करते हैं और उनके फैन भी हैं। मजेदार वाकया हुआ है। मेरे दो अ...
Rajesh Roshan द्वारा Thu May 15 20:08:29 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
मुन्ना की दादी
आज सुबह से ही रो रहा है मुन्ना लगता है दादी की याद आ रही है बहुत खुश होता था मुन्ना जब गोधूलि बेला होते ही वह बुढ़िया दादी के सीने से जाकर दुबक जाता था आंचल को इकठ्ठा कर हाथ में कसकर दबा लेता था उसक...
archana rajhans द्वारा Thu May 15 20:01:25 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
शाकाहार बनाम मांसाहार: कैंसर के बर-अक्स
खान-पान संबंधी पिछली पोस्ट पर एक टिप्पणी में स्वप्नदर्शी ने कहा- "मेरी जानकारी मे संतुलित आहार मे मांस का होना अच्छा है और मांस खाने का कैंसर से कोई सीधा सम्बन्ध नही है।" नीचे लिखे कुछ तथ्यों पर नजर ...
आर. अनुराधा द्वारा Thu May 15 19:59:52 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
बॉक्स ऑफिस: १५.०५.२००८
भूतनाथ और जिम्मी में स्वाभाविक रूप से भूतनाथ को ज्यादा दर्शक मिले। हीरो-हीरोइन की रोमांटिक थ्रिलर या कामेडी जैसी फिल्म नहीं होने के बावजूद दर्शक उत्साह से भूतनाथ देखने आए। शायद अमिताभ बच्चन का आकर्षण ...
chavanni chap द्वारा Thu May 15 19:57:47 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
चार सौ बीस - एपिसोड 34
"क्या मतलब?" मुसीबतचंद के स्वर में विस्मय था. "मतलब ये कि मैं एक रेस्टोरेंट चलाता हूँ. एक दिन वो आया और बातों ही बातों में कहने लगा कि वो साउथ इंडिया से आया है और मेरे दोस्त वासुदेवन का संदेश लाया है....
zeashan zaidi द्वारा Thu May 15 19:52:01 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
भविष्य ...
यह सूखे हुए चेहरे पड़े हुए उन पर निराशायों के घेरे हम से यह पूछते हैं क्या उन से बुरा हुआ है हम क्यों तरस न खाएं उन के लिए भे कोई बदली बरस तो जाए देखो नगन खड़ा है बच्चा सड़क पे किस का भूख के मारे हुए...
Ashoo द्वारा Thu May 15 19:46:39 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
ICICI Bank को कर्ज वसूली के लिए सख्ती पर हिदायत
कर्ज वसूली के लिए गुंडों के इस्तेमाल पर सुप्रीमकोर्ट ने वित्तीय संस्थानों व बैंकों से कहा है कि यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि वे कानून से बंधे हैं। कर्ज वसूली या वाहन जब्ती सिर्फ कानूनी ढंग से ही ...
लोकेश द्वारा Thu May 15 19:11:00 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
एक अचम्भा हमने देखा
किसी एक की चार-पाँच मिलकर खूब कुटाई करें, दे घूँसे पे घूँसा, दे लात पे लात कि सामने वाला अधमरा हो कर गिर जाये, तुर्रा यह कि बावजूद अधमरा होकर गिरे रहने के भी यदा कदा धुनाई जारी ही रहे कि इतने में हीं ...
जुड़िये गँठजोड़ मित्र समुदाय से! (gathjod.com द्वारा Thu May 15 19:08:36 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
उचित मूल्य दुकानों के कामकाज पर लगातार निगाह रखने की जरूरत - डॉ. रमन सिंह
रायपुर, 14 मई 2008 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उचित मूल्य दुकानों के कामकाज पर लगातार निगाह रखने के निर्देश दिए हैं। डॉ. सिंह ने कहा ह...
editor द्वारा Thu May 15 19:08:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दो जानों की क़ीमत, दो रुपए!?
यह घटना किसी एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत पर सवाल उठाती है कि क्या कोई इंसान इतना संवेदनहीन भी हो सकता है। उड़ीसा में एक बस कंडक्टर ने सिर्फ़ दो रुपए के लिए एक बाप-बेटी को चलती बस से धक्का द...
बलबिन्दर द्वारा Thu May 15 18:50:00 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
मूर्ख गुरु और अनपढ़ डॉक्टर!!
..... तौबा रे तौबा!! ...
amit द्वारा Thu May 15 18:37:29 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
अशोक कुमार आखिर हीरो कैसे बने
कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली बांबे स्टुडिओ के प्रयोगशाला सहायक (laboratory assistant) थे| उन ही दिनों में नज़ाम-उल-हुसैन बांबे टाकीज के हीरो हुआ करते थे और नायिका होती थीं देविकारानी जो कि बांबे टाकीज के...
द्वारा Thu May 15 18:32:00 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
बाबरी
प्रपंच किया कुछ सिरफिरों ने रजनी को दिया नाम उषा किताबी फूलों से भर ली मंजूषा जिसमें कौओ ने कांव कांव कर पत्थर डाले असमंजस में पड़ा नादान इंसान डूबता रहा आस्थाओं में भंवर में फंसता रहा एक धरोहर खड़ी हु...
Harihar द्वारा Thu May 15 18:25:18 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दो मुक्तक
भाव की न तो गोदावरी ही बही, न बही नर्मदा न बही ताप्ती भावना लड़खड़ाती हुई रह गईचंद शंकाओं से थी घिरी काँपती रंग फ़ागुन के पतझरचुरा ले गया,जेठ ने लूट ली सावनी हर घटा और अनुभूतियाँ रह गईं मोड़ पर राह अभिव्य...
राकेश खंडेलवाल द्वारा Thu May 15 18:19:01 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दो मुक्तक
भाव की न तो गोदावरी ही बही, न बही नर्मदा न बही ताप्ती भावना लड़खड़ाती हुई रह गईचंद शंकाओं से थी घिरी काँपती रंग फ़ागुन के पतझरचुरा ले गया,जेठ ने लूट ली सावनी हर घटा और अनुभूतियाँ रह गईं मोड़ पर राह अभिव्य...
राकेश खंडेलवाल द्वारा Thu May 15 18:19:01 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दो मुक्तक
भाव की न तो गोदावरी ही बही, न बही नर्मदा न बही ताप्ती भावना लड़खड़ाती हुई रह गईचंद शंकाओं से थी घिरी काँपती रंग फ़ागुन के पतझरचुरा ले गया,जेठ ने लूट ली सावनी हर घटा और अनुभूतियाँ रह गईं मोड़ पर राह अभिव्य...
राकेश खंडेलवाल द्वारा Thu May 15 18:19:00 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दो मुक्तक
भाव की न तो गोदावरी ही बही, न बही नर्मदा न बही ताप्ती भावना लड़खड़ाती हुई रह गईचंद शंकाओं से थी घिरी काँपती रंग फ़ागुन के पतझरचुरा ले गया,जेठ ने लूट ली सावनी हर घटा और अनुभूतियाँ रह गईं मोड़ पर राह अभिव्य...
राकेश खंडेलवाल द्वारा Thu May 15 18:19:00 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
तम्बाकू किल्स समाचार बुलेटिन: १६ मई २००८: अंक ३८०
तम्बाकू किल्स समाचार बुलेटिन १६ मई २००८ अंक ३८० भारत में सबसे अधिक शोषण झेल रहे हैं बीड़ी मजदूर बीड़ी उद्योग तो अपने ही मजदूरों तक पर रहम नही करता है. जो मजदूर बीड़ी बनाने में लगे हैं, वह भारत में मजदू...
Citizen News Service द्वारा Thu May 15 18:14:48 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
अब भी संभलो
चीन में आये भूकंप के बाद मन में उठते कुछ भाव. आशा है आप सहमत होंगे: अब भी संभलो यह धरती है जिसे रौंदती दुनिया बन के भीड़. सब सहती है चुप रहती है मौन उदासी सब कहती है पेड़ कटे आहत है छाती किन...
Udan Tashtari द्वारा Thu May 15 18:10:32 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
घोड़े को अब घोड़ी ही उतार सकती है
जब आदमी केले के छिलके पर फिसल जाये तो फिर रुकने, ब्रेक लगाने का प्रयास कदापि नहीं करना चाहिये, क्योंकि इससे और अधिक चोट आयेगी। बस आराम से फिसलते रहना चाहिये और फिसलने का आनन्द लेना चाहिये। ...
काकेश द्वारा Thu May 15 18:10:22 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
नीयत-ए-शौक़ भर न जाय कहीं
रचना: नासिर काज़मी स्वर: मुन्नी बेग़म नीयत-ए-शौक़ भर न जाय कहीं तू भी दिल से उतर न जाय कहीं आज देखा है तुझको देर के बाद आज का दिन गुज़र न जाय कहीं आरज़ू है कि तू यहाँ आये और फ़िर उम्र भर न जाय कहीं दिल जलात...
अंकुर वर्मा द्वारा Thu May 15 17:55:23 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
कामदेव
संयत देह के भीतर कैसी धधक रही है ज्वाला आँच नियन्त्रण से बाहर हो कर ना दे मुंह काला मूरत देखी खजुराहो में आसक्ति की माया कत्थक हो या भरतनाट्यम वही भाव तो छाया अनुभूति हो अभिव्यक्त तो जीवन मीठी बानी दम...
Harihar Jha हरिहर झा द्वारा Thu May 15 17:54:33 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
आर्ट गैलरी
लाखों बच्चे तरसें, दाने दाने को भूखे बच्चों की तस्वीरें लाखों की...
adab-ghar द्वारा Thu May 15 17:09:05 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
शिक्षक समस्यायों की जड़ नहीं ...............
शिक्षक सब समस्यायों की जड़ नहीं वरन समस्यायों से घिरा हुआ है / फिर भी कई समस्यायों के हल् शिक्षक के पास हैं / शिक्षक अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभा पाए , इसके ...
PRAVEEN TRIVEDI "मनीष" द्वारा Thu May 15 16:58:41 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
जुआ, सट्टा, अवैध शराब और वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने प्रभावी कदम उठाए
रायपुर, 14 मई 2008 - मुख्यमंत्री डॉ. read more »...
Ashok@Internet द्वारा Thu May 15 16:58:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
जुआ, सट्टा, अवैध शराब और वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने प्रभावी कदम उठाए
रायपुर, 14 मई 2008 - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला दण्डाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में जुआ, सट्टा, अवैध शराब तथा वाहन दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए और भी अधिक प्रभावी कदम ...
editor द्वारा Thu May 15 16:58:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
...बस अब कुछ मत बोलो
सुबह का वो शांत मौसम, वो परिंदों की आवाज, सूरज की खुशबू बिखेरती रौशनी और मैं... सूरज की पहली किरण दुआ दे आपको खिलते हुए फूल खुशबू दे आपको हम तो कुछ देने के काबिल नहीं देने वाला हर खुशी दे आपको...
Imran Jalandhari द्वारा Thu May 15 16:48:53 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
कुछ आजमाए हुए धन बनाने के विचार
कुछ लोगों के लिए ये तकनीक का बेजा इस्तेमाल हो सकता है, परंतु कुछ शातिरों के लिए धन बनाने की एक शानदार मशीन. पर, क्या ये धंधा चल निकलेगा? मेरे विचार में ये धंधा क्या ऐसे किसी भी धंधे के ज्यादा दि...
Raviratlami द्वारा Thu May 15 16:30:01 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
'मैं' केवल प्रेम से छूटता है
एक चर्चा में आज उपस्थित था। उपस्थित था जरूर, पर मेरी उपस्थिति न के बराबर थी। भागीदार मैं नहीं था। केवल श्रोता था। जो सुना, वह साधारण था, पर जो देखा, वह निश्चय ही असाधारण था। प्रत्येक विचार पर वहां वा...
राजेंद्र त्‍यागी द्वारा Thu May 15 16:00:07 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
टीले का रहस्य
आज आपको एक कहानी सुनाता हूं। कहानी न अतीत की है और न ही वर्तमान की। कहानी भविष्य की है। भविष्य की है, किंतु कोरी कल्पना नहीं। कल्पना कोरी कल्पना कभी होती भी नहीं है। प्रत्येक कल्पना किसी न किसी यथार्थ...
राजेंद्र त्‍यागी द्वारा Thu May 15 16:00:04 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
'खेलने दो न पापा'
भारत में खेलना आसन नही है। ख़ास करके बच्चो के लिए। उसमे भी विडियो गेम?! माता-पिता के सामने विडियो गेम खेलने के लिए शेर का कलेजा चाहिये। "अरे नालायक! आँख ख़राब हो जाएगा ...अरे! कुछ पढ़ भी लिया कर...गेम ...
नवीन कुमार वर्मा द्वारा Thu May 15 15:59:42 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
चोरों के यहां प्रेम
हाल में इस खाकसार को एक रेडियो चैनल पर लवगुरु जैसा कुछ कार्यक्रम करने को मिला। तमाम तरह के सवालों पर एक्सपर्टों के जो जवाब आये, सो पेश हैं। सवाल-लवगुरु प्लीज बताओ आजकल मेरे पति का हिसाब किताब बदल गया...
alok द्वारा Thu May 15 15:47:56 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
पहला पन्ना
कुछ दिनों से ब्लॉग के प्रति मेरा आकर्षण बढ़ गया है। मैंने अंग्रेजी में एक ब्लॉग शुरू किया है। (http://navinkumarverma.blogspot.com/) . २ - ३ दिनों से मैं ब्लॉग पढने और लिखने में व्यस्त हूँ। और सच कहू...
नवीन कुमार वर्मा द्वारा Thu May 15 15:41:58 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
चाहत
तू ही मेरा इश्क है, और इबादत है तू ही मेरे जीने की चाहत है इन होंठों की तू मुस्कराहट है मौत के सन्नाटे को चीरती हुई जिन्दगी से भरी एक आहट है तू तुझे भूल पाना है मुश्किल बहुत तुझे याद करने की आदत है मु...
Shashank द्वारा Thu May 15 15:25:58 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
याद
जब सर्द ये रातें होती हैं, मेरा दिल तनहा हो जाता है तब नीर भरी मेरी आँखों से, एक अश्क की धारा बहती है सुनता जा ऐ जाने वाले, मेरी धड़कन फ़िर क्या कहती है साँसे यूं मेरी थम जाती हैं, जैसे दुनियाँ कहीं रु...
Shashank द्वारा Thu May 15 15:17:23 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
जाने kyon
दूर जाओ न इस तरह , की पास आ न सकूं पास आओ न इस तरह , की दूर जा ना सकूं भूल जाओ न इस तरह , की याद आ न सकूं याद आओ न इस तरह , की भूला न सकूं रोज मिलो न इस तरह , की जुदा हो न सकूं और जुदा हो न इस तरह , क...
Shashank द्वारा Thu May 15 15:10:23 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
जयपुर बम विस्फोट पर केबिनेट की बैठक में शोक प्रस्ताव पारित
''राज्य सरकार प्रदेश की राजधानी जयपुर में कल शाम कई स्थानों पर हुई, बम विस्फोट की घटना पर गहरा शोक व्यक्त करती है तथा हताहतों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करती ...
Ashok@Internet द्वारा Thu May 15 15:08:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
जयपुर बम विस्फोट पर केबिनेट की बैठक में शोक प्रस्ताव पारित
''राज्य सरकार प्रदेश की राजधानी जयपुर में कल शाम कई स्थानों पर हुई, बम विस्फोट की घटना पर गहरा शोक व्यक्त करती है तथा हताहतों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करती ...
editor द्वारा Thu May 15 15:08:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
नासमझ
जो खामोश रहूँ मैं, तो इंकार ना समझना जो कह दूँ जुबान से , तो इकरार ना समझना है बारिश का पानी , ये आंसू नहीं है जो बहते यूँ देखो , तो प्यार ना समझना देख कर मेरी आंखों मैं , छाई उदासी मुझे दर्द-ऐ-दिल का...
Shashank द्वारा Thu May 15 15:02:35 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
अनन्यचेताः (Always aware)
अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः। तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः॥८।१४॥ अयं श्रीमद्भगवद्गीतायाः अष्टमस्य अध्यायस्य चतुर्दशः श्लोकः अस्ति। कस्मिन्श्चितेन कारणेन यदा अहं अस्य अध्यायस्य अनु...
Himanshu Pota द्वारा Thu May 15 14:53:21 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
यह अंधेरे की सड़क उस भोर तक जाती तो है
इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है। एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों, इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है। एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी, आदमी क...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:43:39 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
आजकल
आजकल सोता कम और ज्यादा जागता हूँ मैं यह सच नहीं है कि सपनों से दूर भागता हूँ मैं कभी इधर तो कभी उधर कभी यहाँ तो कभी वहाँ दिन भर तो सपनों के आगे पीछे भागता हूँ मैं यह सच नहीं है कि सपनों से दूर भागता ...
Rahul Upadhyaya द्वारा Thu May 15 14:29:58 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
एक बन्दर मेरे बगीचे के अन्दर
आज दोपहर हम खाना खाने बैठने ही वाले थे कि भीम भाई ने आकर बताया कि एक बन्दर बगीचे के अन्दर आया है। भगाना नहीं, कहकर मैं व बिटिया कैमरा लेकर बाहर भागे। पति को भी मैंने कह दिया कि साथ बाहर आ जाएँ क्योंकि...
Mired Mirage द्वारा Thu May 15 14:21:43 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
दुष्यंत कुमार की अनमोल नज्मे
यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चले और उम्र भर के लिये... ... कौन कहेगा हुकूमत से, कौन समझेगा एक चिडिया इन धमाकों से सिहरती है ... ... वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता मैं बेक़र...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:19:35 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
मत कहो, आकाश में कुहरा घना है
मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है । सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से, क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है । इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है, हर किसी का पाँव घुटनों तक सना ...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:07:37 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:06:12 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
आज सड़कों पर
आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख, घ्रर अंधेरा देख तू आकाश के तारे न देख। एक दरिया है यहां पर दूर तक फैला हुआ, आज अपने बाज़ुओं को देख पतवारें न देख। अब यकीनन ठोस है धरती हकीकत की तरह, यह हक़ी...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:03:14 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
गांधीजी के जन्मदिन पर
मैं फिर जनम लूंगा फिर मैं इसी जगह आउंगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा लँगड़ाकर चलते हुए पावों को कंधा दूँगा गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को बाँहों में...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 14:01:23 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है चलो यहाँ से चले और उम्र भर के लिये न हो क़मीज़ तो घुटनों से पेट ढक लेंगे ये लोग कितने ...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 13:59:56 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
चांदनी छत पे चल रही होगी
चांदनी छत पे चल रही होगी अब अकेली टहल रही होगी फिर मेरा ज़िक्र आ गया होगा वो बर्फ़-सी पिघल रही होगी कल का सपना बहुत सुहाना था ये उदासी न कल रही होगी सोचता हूँ कि बंद कमरे में एक शम-सी जल रही होगी ते...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 13:58:49 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
भूख है तो सब्र कर
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ| मौत ने तो धर दबोचा एक चीते कि तरह ज़िंदगी ने जब छुआ फ़ासला रखकर छुआ| गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नही पेट भरकर ...
Da Eternal Rebel द्वारा Thu May 15 13:57:36 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
सुनील भाईजी प्रेम भैया....ट्रेनिंग में
सुनील भाईजी प्रेम भैया....ट्रेनिंग में ...
राजीव कुमार द्वारा Thu May 15 13:56:41 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
बेजी की दुनिया में बदलाव...[बकलमखुद-36]
ब्लाग दुनिया में एक खास बात पर मैने गौर किया है। ज्यादातर ब्लागरों ने अपने प्रोफाइल पेज पर खुद के बारे में बहुत संक्षिप्त सी जानकारी दे रखी है। इसे देखते हुए मैं सफर पर एक पहल कर रहा हूं। शब्दों के स...
अजित वडनेरकर द्वारा Thu May 15 13:44:03 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
रिसते रिश्ते
हम तुम जब अलग थे एक दूसरे के प्रति सजग थे मेरा फ़क्कड़पन तुम्हे रास आता था तुम्हारा अल्हड़पन मुझे भा जाता था हम तुम जब अलग थे एक दूसरे से 'अलग' थे बाहर के अंतर के बावजूद अंदर के 'अंतर' से आकर्षित थे ह...
Rahul Upadhyaya द्वारा Thu May 15 13:40:38 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
आंगन में बाजार गायब फुटपाथ
इस बार गांव गया तो देखा वहां से निकल रहे हाइवे से फुटपाथ ही गायब है। पहले यह सड़क कम चाै़डी थी, अब अधिक चाै़डी हो गई है। जब कम चाै़डी थी तो उसके किनारों पर इंर्ट के खडंजे लगे थे। उसके बाद पैदल चलने वा...
ओमप्रकाश तिवारी द्वारा Thu May 15 13:39:49 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
वैश्वीकरण और भाषायी संतुलन : ओम विकास
वैश्वीकरण और भाषायी संतुलन - ओम विकास - भौतिक और आध्यात्मिक विकास का असं...
डॊ. कविता वाचक्नवी द्वारा Thu May 15 13:34:24 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
ख्वाब
(1) रात के नीरव अन्धेरों में, कई ख्वाब आते हैं, चले जाते हैं। छोड़ कर अंतर्मन में एक अजीब सा रिक्त स्थान, फिर नहीं आती नींद भी उनींदी आंखों मे। रहता है इंतज़ार, कि हो सकता है आ जाए फिर कोई ख्वाब नया। ...
विकास परिहार द्वारा Thu May 15 13:15:58 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
हिमाचल प्रदेश के लिए आपदा राहत निधि के लिए 201 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता स्वीकृत
हिमाचल प्रदेश को आपदा राहत निधि के तहत केन्द्र सरकार से लम्बी अवधि उपाय के रूप में 201 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता स्वीकृत की गई है ताकि प्रदेश में गत वर्ष बाढ़ के कारण हुई क्षति की भरपाई...
Ashok@Internet द्वारा Thu May 15 13:08:31 PDT 2008 पर प्रेषितस्रोत: aaaa
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